• 13 Tháng Hai, 2022

गोबर के थैले में लपेटकर फेंका नवजात, दम घोटने को मुंह पर बांधा रुमाल, फिर भी बच गई जान

पीलीबंगा के दुलमानी क्षेत्र में मंगलवार को कलयुगी ममता का क्रूर दृश्य देखने को मिला। दृश्य इतना भयानक था कि मौके पर मौजूद लोगों की रूह कांप उठी। प्रकरण के अनुसार मंगलवार दोपहर को थेहड़ पर उगी साजी(एक प्रकार का पौधा) को काट रहे ठेकेदार के कार्मिकों ने पास में ही किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनी तो वे आवाज की तरफ गए तो उन्हें एक मुंह बंधे हुए थैले में कुछ हलचल देखी। तब उन श्रमिकों ने आसपास के घरों में रहने वाले लोगों को बुलाकर थैले को खोला तो उसमें गोबर के साथ एक नवजात शिशु (लड़का) नग्न अवस्था में पड़ा मिला, जिसका मुंह रूमाल से बांधा हुआ था। ताकि वो रोए तो किसी को उसकी आवाज ना सुन सके।

मालूम पड़ते ही मौके पर अनेक वार्डवासी एकत्रित हो गए और उन्होंने पीलीबंगा पुलिस को सूचित किया। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे एएसआई हंसराज खटोड़ व हैड कांस्टेबल बलतेज सिंह ने मौके पर ही मौजूद एक दाई से बच्चे की गर्भनाल कटवाई और उसे वार्डवासियों के सहयोग से पीलीबंगा के सरकारी अस्पताल में पहुंचाया। जहां मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने लेबर रूम में नवजात के शरीर की सफाई कर उसे कपड़े पहनाकर लेबर वार्ड में मौजूद नवप्रसूता रजनी पत्नी दलीप निवासी वार्ड 6 पीलीबंगा से आग्रह कर उसे मदर फीड दिलवाया।

लावारिस नवजात की सूचना मिलते ही अस्पताल में गोद लेने वालों की लगी होड़

लेबर वार्ड में मौजूद अन्य नवप्रसूताओं व उनके परिजन भी शिशु को एक टक निहारते हुए उसे इस तरह क्रूरतापूर्वक लावारिस गिराकर जाने वाले को कोसते नजर आए। इसके बाद ड्यूटी नर्स शिशु को गोद में लेकर हीटर के आगे बैठकर उसकी देखभाल करती नजर आई। एएसआई हंसराज खटोड़ ने बताया कि फिलहाल नवजात को अस्पताल प्रशासन के सुपुर्द कर दिया गया है। बाद में इसे जिला अस्पताल की बच्चा यूनिट में देखभाल के लिए भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि मंगलवार दोपहर को किसी वक्त कोई अज्ञात व्यक्ति इस नवजात को लावारिस फेंककर गया है।

जिसकी जांच की जा रही है। वहीं थाना प्रभारी दिनेश सारण ने बताया कि प्रकरण को लेकर हनुमान प्रसाद पुत्र श्योराण जाति कुम्हार निवासी वार्ड 22 पीलीबंगा की रिपोर्ट पर अज्ञात व्यक्ति के विरूद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बाल कल्याण समिति ने इस मामले में संज्ञान लिया है।

लावारिस नवजात शिशु के अस्पताल में आने की सूचना मिलते ही अनेक लोगों द्वारा शिशु को गोद लेने की होड़ मच गई। एसडीएम, सरकारी अस्पताल, पुलिस थाना व दैनिक भास्कर कार्यालय में श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जोधपुर व पीलीबंगा के अनेक लोगों ने कॉल कर बच्चे को कानूनी प्रक्रिया से गोद लेने की इच्छा जाहिर की। वहीं एसडीएम प्रियंका तलानिया ने बताया कि बच्चे को गोद लेने की एक विधिवत कानूनी प्रक्रिया होती है। जिसके तहत बच्चे को गोद लेने वाले दंपत्ति के बारे में पूरी जानकारी लेकर आवश्यक नियमों की अनुपालना करते हुए ही उसे गाेद दिया जा सकता है।

अस्पताल में नवजात को लाते ही पुलिस और अस्पताल प्रशासन के सामने भूख से बिलखते शिशु को दूध पिलाने की समस्या आ खड़ी हुई। तब अस्पताल प्रशासन ने लेबर वार्ड में मौजूद नवप्रसूता रजनी पत्नी दिलीप को नवजात को दूध पिलाने का आग्रह किया तो दो बच्चों की मां रजनी ने तुरंत हामी भर दी और शिशु को गोद में लेकर उसे अपना दूध पिलाया। रजनी ने बताया कि दूसरे प्रसव में उसे बेटा ही हुआ है परंतु इस प्रकार एक नवजात को लावारिस हालत में भूख से बिलखते देख उसकी ममता जाग उठी और उसने उसे अपना स्तनपान करवा कर उसकी भूख शांत की तो उसे जो आत्मिक संतुष्टि मिली उसे वह शब्दों में बयां नहीं कर सकती।

वार्ड 22 के निवासी चाचा मोतीराम व भतीजे हनुमान ने बताया कि थेहड़ पर लोगों की भीड़ देखकर वे दोनों वहां पहुंचे। जहां उनको थैले में पड़ा हुआ बच्चा मिला। जिसके मुंह पर रुमाल बंधा हुआ था तभी हनुमान ने पास खड़े अपने दूसरे चाचा सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी नंद कुमार को पुलिस थाने फोन करने को कहा सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर वस्तुस्थिति का जायजा लेते हुए बच्चे को संभाला तब मोती राम और हनुमान ने बच्चे को गोद में लेकर पुलिस के साथ उसे सरकारी अस्पताल लाए मोतीराम ने बताया कि उसके बड़े भाई चानन राम के कोई बच्चा नहीं है। ऐसी स्थिति में एक नवजात शिशु को अपनी गोद में देखकर उसका मन भर आया और उसने बच्चे को अस्पताल पहुंचा कर अपना कर्तव्य निभाया।

गोबर बना कवच; इसके कारण सर्दी से शिशु का हुआ बचाव

मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों, वार्डवासियों व अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने बताया कि नवजात शिशु को लावारिस फेंककर जाने वाले ने तो शिशु को थैले में डालकर उस पर गोबर इसलिए डाला होगा ताकि किसी को शक भी ना हो और दम घुटकर शिशु की मौत हो जाए। परंतु इस सर्दी के मौसम में कंटीली झाड़ियों से यही गोबर शिशु के लिए कवच बन गया। जब प्रत्यक्षदर्शियों ने थैला खोला तो नग्न शिशु गोबर के ऊपर ही सिकुड़कर पड़ा हुआ था। इसी गोबर की नीचे गद्देनुमा परत बन जाने के कारण कंटीली झाड़ियों व सर्दी से शिशु का बचाव हो गया।

संदेह; फिर उठी शक की सुई

पीलीबंगा में इससे पहले भी इस प्रकार की वारदात घटित हो चुकी हैं। परंतु लंबे अरसे बाद इस दिल दहला देने वाली घटना की पुनरावृत्ति क्षेत्र में अवैध रूप से गर्भपात व डिलीवरी करवाने के धंधे में संलिप्त लोग एक बार फिर संदेह के कटघरे में आ खड़े हुए हैं।

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